Nepal Gen z Protest: नेपाल में सोशल मीडिया साइट्स पर सरकारी बैन के खिलाफ उठे युवा आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया है। सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हालात काबू से बाहर होते ही गृहमंत्री रमेश लेखक ने पद छोड़ दिया और राजधानी काठमांडू में सेना उतारनी पड़ी।
कैसे भड़की हिंसा?
काठमांडू में संसद परिसर के सामने हजारों युवा ‘Gen Z’ के बैनर तले जुटे थे। इनमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्र भी शामिल थे। नारेबाजी और प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी संसद परिसर में घुस गए, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन, आंसू गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया। झड़पें राजधानी के अलावा पोखरा, बुटवल, भरतपुर, इटहरी और दमक तक फैल गईं।
गृहमंत्री का इस्तीफा
इन झड़पों में सबसे ज्यादा 17 मौतें काठमांडू में हुईं, जबकि अन्य जिलों में भी जानें गईं। हालात बिगड़ने के बाद नेपाली कांग्रेस के नेता और गृहमंत्री रमेश लेखक ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री ओली को कैबिनेट बैठक के दौरान सौंपा।
अस्पतालों पर बोझ
देशभर के अस्पतालों में घायलों की संख्या 347 से ज्यादा हो गई है। कई अस्पतालों में जगह खत्म होने के कारण मरीजों को अन्य जगह शिफ्ट करना पड़ा। सिर्फ नेशनल ट्रॉमा सेंटर में ही आठ लोगों की जान गई।
सरकार का बयान और बैकफुट
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने हिंसा पर दुख जताया और दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में ‘अनचाहे तत्वों’ की घुसपैठ के कारण हालात बिगड़े। उन्होंने साफ किया कि सरकार का मकसद सोशल मीडिया को ‘बैन’ करना नहीं बल्कि सिर्फ रेगुलेट करना था।
लेकिन विरोध और हिंसा बढ़ने पर सरकार ने बैकफुट लेते हुए बैन हटाने का ऐलान कर दिया। सूचना मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने बताया कि सभी प्लेटफॉर्म्स को दोबारा शुरू करने का आदेश दे दिया गया है।
क्यों लगाया गया था बैन?
नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, एक्स और यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह कहकर बंद किया था कि उन्होंने तय समय सीमा में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। सरकार का दावा था कि यह कदम सिर्फ कानून व्यवस्था और रेगुलेशन के लिए था। हालांकि आम लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मान रहे थे।
विरोध की आवाजें
पत्रकार संगठनों और कंप्यूटर एसोसिएशन ऑफ नेपाल ने भी बैन का विरोध किया। उनका कहना था कि इससे शिक्षा, व्यापार, कम्युनिकेशन और लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होगी।
सोशल मीडिया पर ‘नेपो किड’ ट्रेंड भी छा गया, जिसमें युवा नेताओं और रसूखदार लोगों के बच्चों पर भ्रष्टाचार से फायदे उठाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।








