अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने हैं हमारे उत्पाद: नमस्ते दोस्तों! रजस्थान के कोने-कोने में छिपे खजाने – चाहे कोटा की डोरिया साड़ियां हों या बीकानेर की नमकीन, बूंदी का बासमती चावल, अजमेर का जटिल संगमरमर काम या बारां के कृषि उत्पाद – ये सब अपनी अलग पहचान रखते हैं। पंच गौरव योजना के जरिए सरकार इन्हें न सिर्फ देशभर बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का दावा कर रही थी। लेकिन अब ये सपना अधूरा सा लग रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये योजना जिलों की अनोखी पहचान को मजबूत करके रोजगार के नए रास्ते खोल सकती थी, मगर हालिया फैसलों ने सबको हिला दिया है।
अगर आप भी सोच रहे हैं कि आखिर ये हंगामा क्यों? तो चलिए, आसान भाषा में समझते हैं – क्या है पंच गौरव योजना, किन जिलों पर संकट आया और जनता का दर्द क्या है।
इन जिलों की पहचान पर आया संकट
पिछली गहलोत सरकार ने 2023 में 17 नए जिले बनाए थे, जिनमें नीमकाथाना, दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़ और सांचौर जैसे नाम शामिल थे। लेकिन अब भजनलाल शर्मा सरकार ने दिसंबर 2024 में इन्हें खत्म कर दिया। रजस्थान अब 41 जिलों वाला राज्य बन गया। इससे न सिर्फ प्रशासनिक सर्जरी हुई, बल्कि पंच गौरव योजना पर भी सवाल खड़े हो गए। ये जिले खत्म होने से उनकी खास पहचान – जैसे खनिज, फसलें, उत्पाद – को प्रमोट करने का प्लान दांव पर लग गया। विरोध में नीमकाथाना, केकड़ी जैसे इलाकों में हंगर स्ट्राइक और शटडाउन हो चुके हैं।

ऐसे समझें जिलों की जनता का दर्द
ये सिर्फ कागजी बदलाव नहीं, बल्कि हजारों लोगों की पहचान और रोजगार से जुड़ा मसला है। दो उदाहरण देखिए:
- हमारी पहचान अब कैसे होगी मजबूत? नीमकाथाना जिले में पंच गौरव के तहत खनिज के रूप में फेल्सपार, फसल के रूप में आंवला, खेल के रूप में कुश्ती, वनस्पति के रूप में नीम और पर्यटन स्थल के रूप में मनसा माता को चुना गया था। अगर जिला बरकरार रहता, तो सरकार इसके लिए अलग बजट देती – प्रमोशन, ट्रेनिंग, मार्केटिंग सब होता। अब ये सब सिकार जिले में विलय हो गया, तो नीमकाथाना की अनोखी पहचान दब सी गई। जनता का दर्द: “हमारी विरासत को कौन पहचानेगा?”
- फिर कैसे बढ़ेंगे रोजगार के अवसर? सवाई माधोपुर से अलग होकर बने गंगापुर सिटी जिले में पंच गौरव में उत्पाद के रूप में खीरमोहन, फसल के रूप में सरसों, खेल के रूप में ताईक्वांडो और वनस्पति के रूप में शीशम को चुना गया था। ये सब लोकल इकोनॉमी को बूस्ट करने वाले थे – छोटे बिजनेस, टूरिज्म, स्पोर्ट्स ट्रेनिंग से नौकरियां। लेकिन अब ये वापस सवाई माधोपुर में मिला दिया गया। नतीजा? युवाओं के लिए नए अवसरों का सपना टूटा।
यह है Panch Gaurav Yojana
राजस्थान सरकार ने दिसंबर 2023 में Panch Gaurav Yojana का ऐलान किया था। इसके तहत हर जिले में:
- एक उपज (फसल),
- एक वानस्पतिक प्रजाति (पेड़-पौधा),
- एक उत्पाद (हैंडीक्राफ्ट या लोकल आइटम),
- एक पर्यटन स्थल,
- एक खेल पर खास फोकस। सरकार का दावा था कि इसके लिए अलग बजट होगा – प्रोमोशन, एक्सपोर्ट, ट्रेनिंग सबकुछ। उद्देश्य? जिलों की इकोनॉमी मजबूत करना, लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल मार्केट तक ले जाना। लेकिन अब 9 जिलों के विलय से योजना पर पेंच फंस गया।
एक्सपर्ट व्यू…
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पंच गौरव योजना रजस्थान की अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने का शानदार आइडिया थी। भले ही जिले रद्द कर दिए, लेकिन पुरानी 50 जिलों (अब 41) की संख्या पर ही योजना को आगे बढ़ाना चाहिए। इससे लोकल प्रोडक्ट्स जैसे कोटा डोरिया या नीमकाथाना का फेल्सपार ग्लोबल लेवल पर चमक सकते हैं। एक एक्सपर्ट ने कहा, “ये सियासी सर्जरी न हो, विकास की होनी चाहिए। वरना, राजस्थान की ग्रामीण इकोनॉमी को झटका लगेगा।”
निष्कर्ष
दोस्तों, पंच गौरव योजना रजस्थान के गांवों को ग्लोबल मंच पर लाने का मौका था, लेकिन जिलों के विलय ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। विरोध जारी है – नीमकाथाना में हंगर स्ट्राइक, केकड़ी में शटडाउन। सरकार को चाहिए कि योजना को नए सिरे से लागू करे, ताकि लोकल टैलेंट और प्रोडक्ट्स फल-फूल सकें। अगर आपको ये जानकारी पसंद आई, तो शेयर करें और कमेंट में बताएं – क्या आपके इलाके की पहचान पर असर पड़ा है?








